मेरे अश्क़ेनामुराद यूं, निगाह से थे छलक गए चरागेदिल को बुझा गए, ये आज ऐसे चमक गए हमें प्यास थी दीदार की, हो जाए झलक रुख़ेयार की जिस पल गिरा उनका नक़ाब, उसी पल में पलकें झपक गए मिलके भी तो हम ना मिले, थे … more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: मेरे अश्क़ेनामुराद यूं, निगाह से थे छलक गए चरागेदिल को बुझा गए, ये आज ऐसे चमक गए हमें प्यास थी दीदार … more →