तुम नहीं तो रंग नहीं होली में नहीं सजता आलेखन रंगोली में है दर्द में आज भी वही मज़ा न है लुत्फ़ ग़ैर की ठिठोली में इसमें क्या जाता, तेरा ख़ुदाया! जो चंद ख़ुशियाँ होतीं मेरी झोली मेँ मैं संजो रहा हूँ इक … more →
तख़लीक़-ए-नज़रAmarjeet Singh wrote 1 year ago: नन्हें नन्हें हाथ लिए, चेहरों पे मुस्कान दिए, देखो चला आता है कोई, नाम पूछो तो न बतलाये, मंद मंद ये … more →
विनय wrote 1 year ago: तुम नहीं तो रंग नहीं होली में नहीं सजता आलेखन रंगोली में है दर्द में आज भी वही मज़ा न है लुत्फ़ ग़ैर क … more →