विनय wrote 2 months ago: बारहा पिरोये हैं कई ज़ख़्म साँस के एक ह … more →
विनय wrote 2 months ago: यूँ तो दिल में इक ख़ला बसा रखी है हमने, … more →
विनय wrote 7 months ago: बिन तुम्हारे मैं क्या हूँ तुम न समझोगे … more →
विनय wrote 9 months ago: तो अब दोस्त रह गये बस नाम के हम अज़ीज़ है … more →