क्या वह तुम थे जो आँखों को महका गये तमन्ना दबी-सी मेरे दिल में सुलगा गये मैं कितना तन्हा फिर रहा था जी रहा था यों कि रोज़ मर रहा था तुमने जो धड़कनें जवाँ कीं मुझको ख़्यालों में उलझा गये शाम के साथ तुमक… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: क्या वह तुम थे जो आँखों को महका गये तमन्ना दबी-सी मेरे दिल में सुलगा गये मैं कितना तन्हा फिर रहा था … more →