मेरी मोहब्बत को समझते हो तुम ग़लत, ग़लत नहीं है तुमको चाहा है मैंने अगर इसमें कुछ ग़लत नहीं है दिखा दो तुम कोई अपना-सा इस ज़माने में मुझको मैं अगर फिर चाह लूँ उसको इसमें कुछ ग़लत नहीं है आँखों को मेरी … more →
तख़लीक़-ए-नज़रpalakmathur wrote 2 weeks ago: कुछ अरमान इस दिल के, तनहा जीवन से तन्हाई मिटाने के ख़्वाब, कुछ चाहत उसे पाने की, थोड़ी आरज़ू उसमे खो … more →
विनय wrote 5 months ago: मेरी मोहब्बत को समझते हो तुम ग़लत, ग़लत नहीं है तुमको चाहा है मैंने अगर इसमें कुछ ग़लत नहीं है दिखा … more →
kmuskan wrote 7 months ago: तन्हाई की ऐसी आदत हो गई है कि महफ़िल से डर लगता है किसी के जाने से तो कभी ना डरे पर किसी के … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 11 months ago: बड़ा ख्याल रखा डर डर कर कि तुम्हारी निरव वाणी के सन्नाटे से मेरी मुरझाई चेतना का संतुलन न बिगड़े गीर न … more →
विनय wrote 1 year ago: जिसे दवा जाना वह ज़हर निकला वह कि मेरा क़फ़न उड़ाकर निकला दो उंगलियों में मुझे यूँ मसला उसने मेरे दिल स … more →
विनय wrote 1 year ago: आती-जाती रहती हैं यह सदियाँ रास्ते पर रहती हैं मेरी दो अँखियाँ तेरे इंतज़ार में तुझे देखने के लिए जान … more →
विनय wrote 1 year ago: ओ मेरी जूलियट मैं तेरा रोमियो मैंने प्यार किया तुमसे प्यार किया दुनिया से नहीं मैं ख़ुद से डरता हूँ … more →
विनय wrote 1 year ago: आरज़ू तुम हो मेरी मुझको है पता मैं तो तुमसे मोहब्बत करता हूँ तुम करती हो या नहीं, नहीं हैं पता मिलते … more →
विनय wrote 1 year ago: अब होश नहीं रहता क्या करता हूँ कभी जीता हूँ तो कभी मरता हूँ आने वाले ने इतनी देर लगायी है मैं तो अब … more →
विनय wrote 1 year ago: उसकी आँखों ने मुझे पहचाना तो मगर एक डर से अजनबी-सा डर… चाहता तो रुक कर बात कर लेता मगर मैं - ब … more →
विनय wrote 1 year ago: आज महसूस किया मैंने गर तुम्हें किसी और के साथ देखूँ तो मेरे दिल पे क्या गुज़रेगी कैसा महसूस करूँगा बा … more →