कोई है इस दिल में पर साथ में नहीं है वह मेरा जाने-जिगर, वह मेरा हमसफ़र जिससे मिली थी नज़र वह कहाँ खो गयी है उनकी यादों के सब साये धुँधले पड़ गये हैं दिल के अरमाँ इस ज़मीं में जड़ गये हैं किसी को पता नहीं… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: कोई है इस दिल में पर साथ में नहीं है वह मेरा जाने-जिगर, वह मेरा हमसफ़र जिससे मिली थी नज़र वह कहाँ खो ग … more →