डोल झूले श्याम श्याम सहेली । राजत नवकुंज वृंदावन विहरत गर्व गहेली ॥१॥ कबहुंक प्रीतम रचक झुलावत कबहु नवल प्रिय हेली । हरिदास के स्वामी श्यामा कुंजबिहारी सुंदर देखे द्रुमवेली ॥२॥… more →
पुष्टिमार्गpushtimarg wrote 2 years ago: डोल झूले श्याम श्याम सहेली । राजत नवकुंज वृंदावन विहरत गर्व गहेली ॥१॥ कबहुंक प्रीतम रचक झुलावत कबहु … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: डोल माई झूलत हैं ब्रजनाथ । संग शिभित वृषभान नंदिनी ललिता विशाखा साथ ॥१॥ वाजत ताल मृदंग झांझ डफ रुंज … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: मनमोहन अद्भुत डोल बनी । तुम झूलो हों हरख झुलाऊं वृंदावन चंदधनी ॥१॥ परम विचित्र रच्यो विश्वकर्मा हीरा … more →