मैं आँखों के लिए ख़ाब खरीदने निकला सितारों के लिए चाँद ढूँढ़ने निकला दिन अदा किया तब रात नसीब हुई हर सहर पे रात बेचने निकला सुरमई अँखियों वाली जब याद आयी मैं आँसुओं से फ़रियाद सींचने निकला तकिए पे इक ख… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: मैं आँखों के लिए ख़ाब खरीदने निकला सितारों के लिए चाँद ढूँढ़ने निकला दिन अदा किया तब रात नसीब हुई हर … more →