विनय wrote 1 year ago: मतलब से ही जनम लेता है कोई रिश्ता मतलब से ही मिट जाता है वह रिश्ता तख़लीक़ के इस भँवर में तकलीफ़ है बह … more →
विनय wrote 1 year ago: वफ़ाइयाँ मेरी तुझसे ये वफ़ाइयाँ बेवफ़ाइयाँ मेरी ख़ुद से बेवफ़ाइयाँ अजब कशमकश है तेरे प्यार में जाने क्या … more →
विनय wrote 2 years ago: लोग कहते हैं इश्क़ ने किया है मुझको गुमराह दुनिया में आया हूँ जिसके लिए करे मुझको ज़िबह जिसके लम्स ने … more →
विनय wrote 2 years ago: मेरे ही हाथों में टूटा है दम मेरा तेरे ही स्पर्श से तख़लीक़ हुआ है यह ‘विनय’… नया जन्म हुआ है त … more →
विनय wrote 2 years ago: मेरे ही हाथों में टूटा है दम मेरा, तेरे ही स्पर्श से तख़लीक़ हुआ है यह ‘विनय’ अभी-अभी मेर … more →