वह जो मेरे ज़ख़्म गिनता है तो कहता है बस इतने ही! ख़िज़ाँ आयी बहार लौट गयी निशान रह गये इतने ही उसने नज़र जो उठायी है मिट गये दीवाने कितने ही हमने ज़ख़्म जितने बुझाये हैं सुलगाये हर साँस हैं उतने ही अनाड़… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: वह जो मेरे ज़ख़्म गिनता है तो कहता है बस इतने ही! ख़िज़ाँ आयी बहार लौट गयी निशान रह गये इतने ही उसने न … more →