आँखों की ख़ुशबू को छुआ नहीं महसूस किया जाता है दिल को बहलावा नहीं दर्द दिया जाता है दर्द जो है इश्क़ में वह ही ख़ुदा है सबका दर्द के पहलू में यार को सजदा किया जाता है आँखों की ख़ुशबू को छुआ नहीं महसूस … more →
तख़लीक़-ए-नज़रप्रवीण wrote 5 months ago: मेरे घर की खिड़की से स्टॉकहोम शहर का एक दृश्य, रात ११:०० pm, जून २००९. आपकी याद में दिन गुजर जाता है … more →
विनय wrote 7 months ago: आँखों की ख़ुशबू को छुआ नहीं महसूस किया जाता है दिल को बहलावा नहीं दर्द दिया जाता है दर्द जो है इश्क़ … more →
विनय wrote 7 months ago: सहर-ब-सहर1 मैं ढूँढ़ता रहा शुआएँ2 कहाँ छिप गयीं नूर-सी रोशन निगाहें न कोई घर रहा मेरा न कोई ठिकाना म … more →
विनय wrote 10 months ago: रातभर चाँद देखा किये माज़ी में उड़ रहीं थीं तेरी यादें समेटा किये रातभर चाँद देखा किये कभी हाथ से ढका … more →
kmuskan wrote 11 months ago: तन्हाई की ऐसी आदत हो गई है कि महफ़िल से डर लगता है किसी के जाने से तो कभी ना डरे पर किसी के आने … more →
विनय wrote 1 year ago: तन्हाई में भी हम दोनों साथ हैं यूँ लगता है मानो हाथों में हाथ हैं वह पहली शाम जब देखा था तुम्हें मैं … more →
विनय wrote 1 year ago: बोल तुझे इक हर्फ़ में कैसे लिख दूँ तस्वीर नहीं बनती कभी हर्फ़ों से… तू रोशनी और यह तन्हाई अंधेरा … more →
विनय wrote 1 year ago: जाने कैसी तन्हाई रहती है महफ़िले-यार में दिल में अब भी साँस लेते हैं वह पुराने नाम तुमने मुझे भुलाके … more →
विनय wrote 1 year ago: मुझसे कोई प्यार कर ले दिल अपना देकर, दिल मेरा ले ले मुझसे कोई प्यार कर ले… तन्हाइयों का दर्द छ … more →
विनय wrote 1 year ago: वफ़ाइयाँ मेरी तुझसे ये वफ़ाइयाँ बेवफ़ाइयाँ मेरी ख़ुद से बेवफ़ाइयाँ अजब कशमकश है तेरे प्यार में जाने क्या … more →
विनय wrote 1 year ago: दरवाज़े पे चुप-चुप से वह बैठे हैं दबा के मेरे जैसे तन्हाई वह बैठे हैं उनके दीदार से जो मुझे सुकून है … more →
विनय wrote 1 year ago: बिन तुम्हारे मैं क्या हूँ तुम न समझोगे आप तन्हाई की सदा हूँ तुम न समझोगे तुम्हारे ग़मे-इश्क़ में जो च … more →
विनय wrote 1 year ago: मोती दो’ साथ पिरोना और लड़ना और बिगड़ना और बात अलग है तन्हा जीना तन्हाई से बातें करना और आधी-आ … more →
विनय wrote 1 year ago: तन्हाई यूँ ढूँढ़ती है मुझे जैसे मेरी सदा तुम्हें जो दीवारें ख़ुद-ब-ख़ुद गिरती हैं मैं कैसे चुनावाऊँ … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरा दीवाना दिल धड़कता है, तेरे लिए पल-पल चोरी-चोरी तड़पता है, तेरे लिए जीता है तेरे लिए, मरता है ते … more →
विनय wrote 1 year ago: ना जीने को जी करता है ना मरने को जी करता है तू नहीं है जो साथ मेरे साथ रहने क … more →
विनय wrote 1 year ago: जाने किस गली में, मैं चाँद भूल आया हूँ जाने किस गली में चाँद मुझे भूल आया है तन में जो जलती है रफ़्ता … more →
विनय wrote 1 year ago: आती-जाती रहती हैं यह सदियाँ रास्ते पर रहती हैं मेरी दो अँखियाँ तेरे इंतज़ार में तुझे देखने के लिए जान … more →
विनय wrote 1 year ago: यह कोरे काग़ज़ करते हैं दिल की बात जैसे यह कोरे हैं वैसे मेरे दिन-रात अपनी मुलाक़ात कब मुकम्मल हुई थी द … more →