ज़िन्दगी के मायने कुछ धुंधलाने लगे है “फार्मोलों “से आगे “बिज़नस सूट “आने लगे है दफ्तरों से निकल बाहर पंहुचा है व्यापार “गोल्फ कोर्सों ” पे अब शामियाने सजे है हाई क… more →
ए पंखुरी पपीहाsonyagee wrote 4 months ago: ज़िन्दगी के मायने कुछ धुंधलाने लगे है “फार्मोलों “से आगे “बिज़नस सूट “आने लग … more →
विनय wrote 6 months ago: कुछ तो था कुछ तो है तेरे-मेरे बीच सजनी वरना तुम यहाँ न आती वरना यादें तेरी न होती यूँ बरस गुज़रते हैं … more →
विनय wrote 1 year ago: वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी जिसका इंतिज़ार करता हूँ यारा जिसके लिए फिरता हूँ मारा-मारा वह कब आयेगी जो … more →
विनय wrote 1 year ago: शबनमी सर्द रात है और ख़्याल तेरा चाँद तन्हा मैं तन्हा और ख़्याल तेरा सबसे छुपाया पर छुपा न राज़े-मोहब … more →
विनय wrote 1 year ago: और दाँव अपनी जाँ का किसने लगाया होगा फिर इश्क़ ने फ़रहाद कोई बुलाया होगा यूँ ही नहीं बिगड़ता है कोई कि … more →
विनय wrote 1 year ago: मोती दो’ साथ पिरोना और लड़ना और बिगड़ना और बात अलग है तन्हा जीना तन्हाई से बातें करना और आधी-आ … more →
विनय wrote 1 year ago: क्या वह तुम थे जो आँखों को महका गये तमन्ना दबी-सी मेरे दिल में सुलगा गये मैं कितना तन्हा फिर रहा था … more →
विनय wrote 1 year ago: तेरी जो ख़ाहिश करता हूँ क्या कोई गुनाह करता हूँ चाहे जो भी समझ ले तू मैं तुझसे प्यार करता हूँ यह उम् … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं उससे मोहब्बत करता था आज भी करता हूँ काँच के दिल में जान भरता हूँ मेरे ख़ाबों में मेरे सपनों में … more →
विनय wrote 1 year ago: बिछड़ के रहना सीख लिया है क्या तुमने, क्या तुमने बिछड़ के रहना सीख लिया है क्या तुमने, क्या तुमने … more →
विनय wrote 1 year ago: जो दिल से जाता नहीं है तू वह गीत है जो दिल में आकर बसा था तू वह मीत है साँसों की सरगम बस तुम ही तुम … more →
विनय wrote 1 year ago: एक मेरा सपना तू ही तो थी जाना दूर जो गयी तू हो गया वह बेग़ाना इंतिज़ार तेरा करता हूँ तेरी क़सम हर लम्ह … more →
विनय wrote 1 year ago: तू एक बार देख ले पीछे मुड़के हम हैं वहीं जहाँ थे कभी अकेले ऐसा यह क्या हो गया अन्जाने दिल मेरा क्यों … more →
विनय wrote 1 year ago: कोई आता है ज़िन्दगी में, जैसे रोशनी जज़्बों का शौक़ के बाद क्यों कुछ कमी उसकी आँखें हमने देखी हैं नीली- … more →
विनय wrote 1 year ago: जानते हैं दर्द बुझते हुए चाँद का जब बढ़ते आते हैं सुबह के क़दम जुस्त-जू की छाया खो जाती है कहीं चाँद … more →
विनय wrote 1 year ago: जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं कैसे कहें कितना तन्हा कर जाती हैं रोते हैं सब से छिपकर अँधेरों में ख़ुद … more →
विनय wrote 1 year ago: एक ही रास्ता जब है दोनों का फिर क्यों दोनों तन्हा फिर क्यों दोनों तन्हा मेरा मरहम है तू मेरा मज़हब है … more →
विनय wrote 1 year ago: तेरी यादों के साये तले जाने हम- कितनी दूर तक चले क्या ख़बर कब… थकते क़दमों की शाम ढले जाने कब प … more →
विनय wrote 1 year ago: तेरी यादों के, तेरे ख़ाबों के, साये तले हम कितनी दूर निकल आये, कहाँ चले तेरी यादों की धुँधली शाम … more →