जो इश्क़ की आग भड़क उठी है जैसे मैं शोलों में जल रहा हूँ तेरे बदन की कशिश का है जादू देखकर तुझ को मचल रहा हूँ मुझे है ख़ाहिशो-तमन्ना1 तेरी मैं उम्मीद को मसल रहा हूँ एक यह ख़ाब मैं देखता हूँ कि तेरी मरम… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 5 months ago: उसने हमसे कभी वफ़ा न की और हमने भी तमन्ना न की बहुत बोलते हैं सब ने कहा सो आदत-ए-कमनुमा न की बहुत आये … more →
विनय wrote 6 months ago: झोंके हवा के उसका रूख़सार चूमते हैं फूल उसकी आँखों को देख यार झूमते हैं तेरे हुस्नो-शबाब के बारे क्य … more →
विनय wrote 8 months ago: तुम आये क्यों जब तुम्हें जाना ही था मुझसे दूर जाकर मुझे भुलाना ही था बदली-बदली फ़िज़ा में कुछ अपना लगा … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: करवटें बदलते रहते हैं लेकिन नींद नही आती आखों क सामने बस तु ही तु छा जाती समझाया हमने भी बहुत अपने द … more →
विनय wrote 1 year ago: क्या वह तुम थे जो आँखों को महका गये तमन्ना दबी-सी मेरे दिल में सुलगा गये मैं कितना तन्हा फिर रहा था … more →
विनय wrote 1 year ago: हज़ारों की भीड़ में हम अकेले रह गये जिसके साथ की तमन्ना थी मेरे दिल को वह तो केवल अब मेरे ख़ाबों में … more →
विनय wrote 1 year ago: एक ख़ुशबू जाने कहाँ से आयी है कुछ दिनों से दिल पर छायी है शायद, शायद ऐसा तब लगता है जब प्यार किसी से … more →
विनय wrote 1 year ago: किस राह को चल रहे थे किस राह को हम चल दिये, उनसे प्यार लिए हम चले इक नये सफ़र पर, लुटा दिया सारा जो क … more →
विनय wrote 1 year ago: तेरा चेहरा मेरे प्यार की तस्वीर है तू मोहब्बत है मेरी या फिर साँसों की ज़ंजीर है जब तुझे देखा सनम मुझ … more →
विनय wrote 1 year ago: ख़ामोश सदाओं से कोई बुलाये मुझको बड़े दिन हुए कोई रुलाये मुझको अपना अब कहूँ किसे कोई नहीं मेरा ख़ुशी … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: मुझको उनसे प्यार बहुत है, शहर मे ये तकरार बहुत है, आंखे जैसे फूल कवल का, चेहरा उनका रूप ग़ज़ल का, जुल् … more →
विनय wrote 1 year ago: जब तक तेरी तमन्ना करेंगे जीते जायेंगे वरगना दम तोड़ देंगे मर जायेंगे तुमने जो कहा तो मर भी जाना है ह … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: दर्द-ऐ-दिल हो एक ग़ज़ल हो, दर्द-ऐ-दिल हो एक ग़ज़ल हो, दर्द-ऐ-दिल हो एक ग़ज़ल हो, हाथ न आए, हाथ न आए, हाथ न … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: आ तुझे दोस्त जान-ऐ-दिल कह दे, आ तेरे नाम एक ग़ज़ल कह दे, सोचता हूँ के तेरी आंखो को, झील कह दे या फिर क … more →
विनय wrote 1 year ago: आज फिर धुँधले बादलों के पार देखा चाँद, सुनहरा चाँद… आज फिर तेरी याद आयी, आज फिर मेरा जिस्म महक … more →
विनय wrote 1 year ago: तुमसे चाहत है तुमसे इबादत है मुझे इश्क़ है तुमसे … तुमको देखा तो जाना प्यार क्या है ज़िन्दगी क्य … more →