विनय wrote 1 year ago: जो जन शाइरी का फ़न समझते होंगे हम को शाइर तो न समझते होंगे ‘विनय जी’ कैसे लिखते हैं आप ऐस … more →
विनय wrote 1 year ago: तरक़ीब कोई पहाड़ उठाने की क्यों इसे सिर पे उठा रखा है किसके सर ये आफ़त पटकोगी शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़ … more →
विनय wrote 2 years ago: क्यों खेलते हो? जल जाओगे! इक आग है ‘विनय’ तरक़ीब पे तरक़ीब खेलते हो कुछ और है ‘विनय … more →