मै बनूं शाहजहां तू मेरी मुमताज़ महल आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल तू ही उर्दू का अदब और तू ही शेर-ओ-सुख़न तू ही है गीत-ओ-रुबाई-ओ-क़ता हम्द-ए-ज़हन तू ही है शेर का अशआर तू मफ़हूम-ए-नज़्म तू ही महफ़… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 11 months ago: मै बनूं शाहजहां तू मेरी मुमताज़ महल आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल तू ही उर्दू का अदब और तू ही श … more →