सिवा इससे जो भी हो, करेंगे महब्बत तुझ बिन किसी से न करेंगे क़ज़ा ने भी हमसे ताक़त आज़माई की तुझ बिन हम जहाँ से न चलेंगे ख़ूब-रू कितने ही हुस्न दिखाते हैं हम उनसे मुँह लगाई न करेंगे बियाबाँ में ढकेला मुझको… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: सिवा इससे जो भी हो, करेंगे महब्बत तुझ बिन किसी से न करेंगे क़ज़ा ने भी हमसे ताक़त आज़माई की तुझ बिन हम ज … more →