रेशम सी किरने,एक नया सवेरा फूलों में बदली सारी कलिया कही दव की बूँदे ,थोड़ी पत्तियों की शरारत सारी अवनी पर,एक नयी हरकत खुशबू की कशीश्, महकता समा अपना अपना फूल चुनने आई तितलिया कानो में करती मधुर वाण… more →
mehhekk wrote 1 year ago: रेशम सी किरने,एक नया सवेरा फूलों में बदली सारी कलिया कही दव की बूँदे ,थोड़ी पत्तियों की शरारत सारी … more →
Tags: Hindi Poem, Kavita, Love, Mehek, mehhekk, mohobaat, mülakat, Poems, Prem
Follow this tag via RSS