हम कितने भी दोस्ती का भाव रखते हों पर वे हमसे हमेशा डरती ही हैं। अपने-आप को इतना छिपाने की कोशिश करती हैं कि दिखाई देनी बंद हो जाती हैं। उनका अपने में मगन रहना और फुदक-फुदक कर चीं-चीं करते हुए इस शाखा… more →
पसंदप्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: हम कितने भी दोस्ती का भाव रखते हों पर वे हमसे हमेशा डरती ही हैं। अपने-आप को इतना छिपाने की कोशिश करत … more →
प्रेमलता पांडे wrote 10 months ago: रंग-रंग के पंखों वाली, भागी-भागी, आती-जाती, फूलों पर और डाली-डाली। न तो पूछे, न तो बताती, क्या तू … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: सूरज की किरण मेरे चाँद से टकराई, तन बदन मे मेरे जैसे आग लग आई, उसने ली कुछ इस तरह से अंगडाई, फूलों स … more →
विनय wrote 1 year ago: जादू जैसा छाया पहला-पहला नशा जी में आये पंख खोल उड़ जाऊँ मैं आस्माँ से आगे निकल जाऊँ मैं मस्ती दिल प … more →