मैं आँखों के लिए ख़ाब खरीदने निकला सितारों के लिए चाँद ढूँढ़ने निकला दिन अदा किया तब रात नसीब हुई हर सहर पे रात बेचने निकला सुरमई अँखियों वाली जब याद आयी मैं आँसुओं से फ़रियाद सींचने निकला तकिए पे इक ख… more →
तख़लीक़-ए-नज़ररवि कुमार, रावतभाटा wrote 6 months ago: तोप के मुँह में तिनका रख रही है कविता – तैयब हुसैन ( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं आँखों के लिए ख़ाब खरीदने निकला सितारों के लिए चाँद ढूँढ़ने निकला दिन अदा किया तब रात नसीब हुई हर … more →
विनय wrote 2 years ago: मैं वो आग हूँ जो लग जाऊँ तो जंगल का तिनका-तिनका जला दूँ फैल जाऊँ चंद लम्हों में कुछ इस तरह जैसे आग क … more →