Blogs about: तुकान्त

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हार पहनाया मुझे !3 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: मिला सम्मान उसे नकारुं कैसे? हार पहनाया मुझे,  हार उतारुं कैसे? हाय! क्षणभंगुर इन फूलों का जीवन कुम् … more →

Tags: व्यंग्य, हास्य, अकड़, अहं, माला, सम्मान, हार

मुसाफ़िर

Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: माना ये जग है सफर चार दिन का हम हैं मुसाफिर ये मेला छूटेगा जब होगा धमाका मौत छीन लेगी खाली हाथ जाते … more →

Tags: हिन्द-युग्म, इन्सान, बकवास, मुसाफ़िर, मेला, सफर

मां और मातृभूमि8 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago:                      ( एक प्रवासी भारतीय के द्रष्टिकोण से ) छुटा देश तो जीना दूभर  दुखड़ा किससे कह … more →

Tags: रचनाकार, प्रवासी, भारतीय, मातृभूमि

जहरीला सांप7 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: भेष आदमी का धर कर आया जहरीला सांप उगले जहर घृणा का कितना नाप सके तो नाप   नीच इरादा पूरा करने लिया … more →

खिलने दो खुशबू पहचानो

Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: विषम स्थिति हो लोग पराये फिर भी सब मे ईश्वर जानो भांति भांति के फूल जगत मे खिलने दो खुशबू पहचानो   … more →

Tags: अनुभूति, मंच

धुमिल हो गये4 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: ( युद्ध की विभिषिका से पीड़ितों को समर्पित )  टकरा लिये मौत से हरदम जीवन से अब हारे आंधी ऐसी धुमिल हो … more →

Tags: पीड़ित, युद्ध

लम्हा3 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: नदी की बूंद सा बहता लम्हा हुआ ना तिजोरी मे कैद लम्हा   ख्यालों पे जीवन लुटाता रहा जीत हार बदले मे प … more →

Tags: शब्दान्जलि

प्यार की उमंग7 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: मोम की कसक जो दर्द बन गई पिघलपिघल लौ से दूर हो गया आंसुओं की गर्मी से कराह कर खण्ड मे बंटा तो चूर हो … more →

Tags: गीत, प्रकृति

अंगुर खट्टे हैं6 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: मेहनत मधुमक्खी  करले हम घोघे और तिलचट्टे हैं मिल जायें तो मीठे ना मिल पाये अंगुर खट्टे हैं    सुस् … more →

Tags: व्यंग्य, हास्य

शरमा रहा4 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: पौ फटी नभ लाल हो कर सूर्य से शरमा रहा चांद गर्वित रूप था कल मेरे आगे कुछ नहीं लजाती दुल्हन से पूछो … more →

Tags: प्रकृति, शरमाना

रिमझिम यह बरसात4 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago:  मनमयूर लो नचा गई रिमझिम यह बरसात लिखी किसी के भाग्य मे आंसू की सौगात   भीगा सावन प्यार मे जल मे भीग … more →

Tags: अनुभूति

बालहठ2 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: (प्यारे शिशुओं को समर्पित) राजहठ और नारी हठ तो दर्द देता हर कहीं बालहठ को प्यार में हरगीज भूला सकत … more →

Tags: बालहठ, शिशु

चल तू अकेला8 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: मियांबीबी दो झगड़ते थे भारी सोंचा सुलह करवा देगें हम सारी फंस गये मियांबीबी दोनो को झेला दुनियां का म … more →

Tags: व्यंग्य, हास्य

कारगील हो या गेलीपोली*1 comment

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: मौत से आंखमिचोली कारगील हो या गेलीपोली    जंग की शतरंज का वादा कोई वजीर ना प्यादा सीने मे लगती जब … more →

Tags: मंच

मौत भी थम जाये8 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: अगर तुम ना जाओ मौत भी थम जाये साथ हो तुम जैसा काल भी शरमाये धड़कन जीवन की जगी सब अरमां जागे प्रीत की … more →

नंगा बोल पड़ा4 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago:                         कंगला डूबा चिन्ता मे तू मुझे लूट कर क्यों ले जाय नंगा बोल पड़ा हाय! तू मेरे क … more →

Tags: मंच, व्यंग्य, हास्य

नखरारी नार3 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: पिचकारी खेले ससुरी ऐसे रंग फेंक कर के मचलती कैसे बौछार तीर की निकलती ज्वाला चमकार बिजली की झूमती … more →

Tags: मंच, रचनाकार, हिन्दीनेस्ट

पतझड़*2 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago:  -हरिहर झा आंसू मे डूबी वीणा ले मधुर गीत मै कैसे गाता बचपन मेरा सूखा पतझड़ हरियाली मै कैसे लाता खेलकू … more →

Tags: अनुभूति, मंच

मां की याद

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: मां के हाथों की बनी जब दाल रोटी याद आई पंचतारा होटलों की शान शौकत कुछ न भाई    बैरा निगोड़ा पूछ जाता … more →

Tags: अनुभूति, मंच, साउथ एशिया टाइम्स


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