मिला सम्मान उसे नकारुं कैसे? हार पहनाया मुझे, हार उतारुं कैसे? हाय! क्षणभंगुर इन फूलों का जीवन कुम्हलाकर सब व्यर्थ हो जायगा दिखा दिखा कर अकड़ रहा हूं क्षण गया यह तो अनर्थ हो जायगा बिना तृप्त किये अहं … more →
हरिहर झाHarihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: मिला सम्मान उसे नकारुं कैसे? हार पहनाया मुझे, हार उतारुं कैसे? हाय! क्षणभंगुर इन फूलों का जीवन कुम् … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: माना ये जग है सफर चार दिन का हम हैं मुसाफिर ये मेला छूटेगा जब होगा धमाका मौत छीन लेगी खाली हाथ जाते … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: ( एक प्रवासी भारतीय के द्रष्टिकोण से ) छुटा देश तो जीना दूभर दुखड़ा किससे कहना … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: भेष आदमी का धर कर आया जहरीला सांप उगले जहर घृणा का कितना नाप सके तो नाप नीच इरादा पूरा करने लिया ध … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: विषम स्थिति हो लोग पराये फिर भी सब मे ईश्वर जानो भांति भांति के फूल जगत मे खिलने दो खुशबू पहचानो अ … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: ( युद्ध की विभिषिका से पीड़ितों को समर्पित ) टकरा लिये मौत से हरदम जीवन से अब हारे आंधी ऐसी धुमिल हो … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: नदी की बूंद सा बहता लम्हा हुआ ना तिजोरी मे कैद लम्हा ख्यालों पे जीवन लुटाता रहा जीत हार बदले मे पा … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: मोम की कसक जो दर्द बन गई पिघलपिघल लौ से दूर हो गया आंसुओं की गर्मी से कराह कर खण्ड मे बंटा तो चूर हो … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: मेहनत मधुमक्खी करले हम घोघे और तिलचट्टे हैं मिल जायें तो मीठे ना मिल पाये अंगुर खट्टे हैं सुस्ती … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: पौ फटी नभ लाल हो कर सूर्य से शरमा रहा चांद गर्वित रूप था कल मेरे आगे कुछ नहीं लजाती दुल्हन से पूछो म … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: मनमयूर लो नचा गई रिमझिम यह बरसात लिखी किसी के भाग्य मे आंसू की सौगात भीगा सावन प्यार मे जल मे भीग … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: (प्यारे शिशुओं को समर्पित) राजहठ और नारी हठ तो दर्द देता हर कहीं बालहठ को प्यार में हरगीज भूला सकते … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: मियांबीबी दो झगड़ते थे भारी सोंचा सुलह करवा देगें हम सारी फंस गये मियांबीबी दोनो को झेला दुनियां का म … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: मौत से आंखमिचोली कारगील हो या गेलीपोली जंग की शतरंज का वादा कोई वजीर ना प्यादा सीने मे लगती जब गो … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: अगर तुम ना जाओ मौत भी थम जाये साथ हो तुम जैसा काल भी शरमाये धड़कन जीवन की जगी सब अरमां जागे प्रीत की … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: कंगला डूबा चिन्ता मे तू मुझे लूट कर क्यों ले जाय नंगा बोल पड़ा हाय! तू मेरे क … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: पिचकारी खेले ससुरी ऐसे रंग फेंक कर के मचलती कैसे बौछार तीर की निकलती ज्वाला चमकार बिजली की झूमती बाल … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: -हरिहर झा आंसू मे डूबी वीणा ले मधुर गीत मै कैसे गाता बचपन मेरा सूखा पतझड़ हरियाली मै कैसे लाता खेलकू … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: मां के हाथों की बनी जब दाल रोटी याद आई पंचतारा होटलों की शान शौकत कुछ न भाई बैरा निगोड़ा पूछ जाता … more →