Blogs about: तुकान्त

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हार पहनाया मुझे !3 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 4 months ago: मिला सम्मान उसे नकारुं कैसे? हार पहनाय … more »

Tags: व्यंग्य, हास्य

मुसाफ़िर

Harihar Jha हरिहर झा wrote 4 months ago: माना ये जग है सफर चार दिन का हम हैं मुसा … more »

Tags: हिन्द-युग्म

मां और मातृभूमि8 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 7 months ago:                      ( एक प्रवासी भारतीय के … more »

Tags: रचनाकार

जहरीला सांप7 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 7 months ago: भेष आदमी का धर कर आया जहरीला सांप उगले … more »

खिलने दो खुशबू पहचानो

Harihar Jha हरिहर झा wrote 8 months ago: विषम स्थिति हो लोग पराये फिर भी सब मे ई … more »

Tags: अनुभूति, मंच

धुमिल हो गये4 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 8 months ago: ( युद्ध की विभिषिका से पीड़ितों को समर् … more »

लम्हा3 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 8 months ago: नदी की बूंद सा बहता लम्हा हुआ ना तिजोर … more »

Tags: शब्दान्जलि

प्यार की उमंग7 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 8 months ago: मोम की कसक जो दर्द बन गई पिघलपिघल लौ से … more »

Tags: गीत

अंगुर खट्टे हैं6 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 8 months ago: मेहनत मधुमक्खी  करले हम घोघे और तिलचट … more »

Tags: व्यंग्य, हास्य

शरमा रहा4 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 9 months ago: पौ फटी नभ लाल हो कर सूर्य से शरमा रहा च … more »

रिमझिम यह बरसात4 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 9 months ago:  मनमयूर लो नचा गई रिमझिम यह बरसात लिखी … more »

Tags: अनुभूति

बालहठ2 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 10 months ago: (प्यारे शिशुओं को समर्पित) राजहठ और ना … more »

चल तू अकेला8 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 10 months ago: मियांबीबी दो झगड़ते थे भारी सोंचा सुलह … more »

Tags: हास्य, व्यंग्य

कारगील हो या गेलीपोली*1 comment

Harihar Jha हरिहर झा wrote 10 months ago: मौत से आंखमिचोली कारगील हो या गेलीपोल … more »

Tags: मंच

मौत भी थम जाये8 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 12 months ago: अगर तुम ना जाओ मौत भी थम जाये साथ हो तुम … more »

नंगा बोल पड़ा4 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago:                         कंगला डूबा चिन्ता म … more »

Tags: मंच, व्यंग्य, हास्य

क्षतिपूर्ति5 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: मानव जिस अंग पर रह गया अधुरा कुदरत और र … more »

Tags: व्यंग्य

नखरारी नार3 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: पिचकारी खेले ससुरी ऐसे रंग फेंक कर क … more »

Tags: मंच, रचनाकार, हिन्दीनेस्ट

पतझड़*2 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago:  -हरिहर झा आंसू मे डूबी वीणा ले मधुर गी … more »

Tags: अनुभूति, मंच


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