(यह लेख २१ अगस्त, १९७७ को नवभारत टाइम्स में प्रकाशित हो चुका है।) ‘जिन्होंने चिरपिपासाकुल संसार के संतप्त पथिकों के लिए सुशीतल सुधा-स्रोत-स्विनी पुन्य सरिता – रामभक्ति मन्दाकिनी की धवलधारा बहा द… more →
पसंददीपक भारतदीप wrote 1 month ago: रामचरित मानस लिखने के 387 वर्ष बाद एक संत ने यह शोध प्रस्तुत किया है कि उसमें व्याकरण और भाषा की तीन … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 years ago: (यह लेख २१ अगस्त, १९७७ को नवभारत टाइम्स में प्रकाशित हो चुका है।) ‘जिन्होंने चिरपिपासाकुल संसार के स … more →