यह सावन मेरा मन पढ़-पढ़ रोया अबकि बार यह गरज मुझे डराती रही तेरे तेवर की तरह बदलना था तुम्हें तो मुझको तुमने बदला क्यों हमने ग़म को पहना है दिल पे ज़ेवर की तरह शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’ लेखन वर्ष: २००… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 11 months ago: यह सावन मेरा मन पढ़-पढ़ रोया अबकि बार यह गरज मुझे डराती रही तेरे तेवर की तरह बदलना था तुम्हें तो मुझ … more →
विनय wrote 1 year ago: तुमको लौट के यहीं आना है (यहीं आना है) तुम मानो या न मानो मेरा दिल तेरा आशियाना है (आशियाना है) तुम … more →