‘नज़र’ वो नज़र जो लग जाये तो तबाह कर दे अपनी पे आये तो हर इक अदू को बरबाद कर दे उसका तैशो-जुनूँ पागलपन की हद है वह अपनी से गुज़र जाये तो हर गुनाह कर दे उसके नाम के साथ जो भी जफ़ा करेगा हरजाई … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 2 years ago: ‘नज़र’ वो नज़र जो लग जाये तो तबाह कर दे अपनी पे आये तो हर इक अदू को बरबाद कर दे उसका तैशो … more →