Alok Pandey wrote 4 months ago: इतिहास हमेशा अपने आप को दुहराता है लेकिन बहुत कम लोगों की आंखे इस बदलाव को देख पाती है और बहुत कम लो … more →
Alok Pandey wrote 4 months ago: समाजवाद की थाली में तुमलोगों ने परोस रखी है पतली दलिया जरा धीरे धीरे चाटो सियार बंधुओ मैं बगुला जो ठ … more →
Alok Pandey wrote 4 months ago: साम्यवाद की धुन पर तुम मुझे चमकते चांद पर लाए हो पर यह तो सी ऑफ ट्रांक्यूलिटी का हिस्सा है मेरे दोस् … more →
Alok Pandey wrote 4 months ago: Samyawad ki dhun par tum mujhe chand par laye par ye to “sea of tranquility” ka hissa ha … more →
Alok Pandey wrote 5 months ago: वर्षों से सुन रहा हूं शोर गांधी को उसने मारा पर देख रहा हूं इस देश में चुप होकर बिल्कुल चुप हर दिन ह … more →
Alok Pandey wrote 8 months ago: मैंने तुम्हें ख्वाब में बसाया था और खुद को मैंने तुझमें छुपाया था तुम हो कि ख्वाब तोड़ के आ गए धरा प … more →
Alok Pandey wrote 8 months ago: तुझको छुपा लाता मैं रक्त में सेंध गर लग।ता कभी वक्त में । … more →
Alok Pandey wrote 1 year ago: प्रश्न यह नहीं है कि राम थे कि नहीं प्रश्न यह भी नहीं है कि चरारे शरीफ में रखा गया बाल किसका है प्रश … more →
Alok Pandey wrote 1 year ago: धरती पर जो भी आया उस पर मौत की उजली छाया तो मौत भी मर जाएगी मुझसे कफन ले जाएगी उजले उजले चादर में मे … more →
Alok Pandey wrote 1 year ago: एक दिन ऐसा ना गुज़रा जब दिल ने ना तुझे याद किया हर शाम तेरी पूजा करके हर सुबह तेरा नाम लिया … more →