वह कहाँ चले गये जो कल घर आये थे हमारे थोड़ा-सा और क़रीब हमारे वह कहाँ चले गये जो कल घर आये थे हमारे बड़ी रहमत की थी जो आये किसी बहाने से उनके चेहरे पर थी दबी-सी मुस्कुराहट आँखें कह रही थीं अनकहे अफ़साने… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: वह कहाँ चले गये जो कल घर आये थे हमारे थोड़ा-सा और क़रीब हमारे वह कहाँ चले गये जो कल घर आये थे हमारे ब … more →