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Blogs about: तो

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कोई मुग़ालता तो नहीं4 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: देख आऊं वो गिरा खून कहीं मेरा तो नहीं मेरी ही लाश सजी हो कहीं ऐसा तो नहीं टूट ही जाते हैं ख़्वाब, साँ … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, apr 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

उसकी गली में देख तो मुझे आज मेरा पता मिला4 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: उसकी गली में देख तो मुझे आज मेरा पता मिला दैरोहरम भटका किया, दिलेबेख़बर में खुदा मिला जिस मोड़ से मै ब … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Mar 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

रदीफ़ का खेल.....3 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: पैमानेग़म बिखर गया तो मुश्किल होगी ये दिल से उतर गया तो मुश्किल होगी उसे देखा है आज मुद्दतों के बाद क … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Mar 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

देख तो2 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: कैसा सजा है आज ये बाज़ार देख तो इन्सान ही इन्सां का खरीदार देख तो कैसा लगा है आज ये दरबार देख तो मुंस … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Mar 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

मोहब्बत रुकी हो तो मय्यत उठा लो2 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: मै सजदे में उनके कुछ यूँ झुका था वो शरम कर के बोले सर को उठा लो हैं आँखों का काजल घटाओं सा फ़ैला कहीं … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, NOV 2007, हो, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

वो नहीं क़ातिल ये तो खंजर की ख़ता थी

Rohit Jain wrote 1 year ago: वो नहीं क़ातिल ये तो खंजर की ख़ता थी वो कहाँ बदले मेरी नज़र की ख़ता थी उस ही की दीवारें ज़रा मजबूत नहीं थ … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Oct 2007, की, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit


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