देख आऊं वो गिरा खून कहीं मेरा तो नहीं मेरी ही लाश सजी हो कहीं ऐसा तो नहीं टूट ही जाते हैं ख़्वाब, साँस और उम्मीदें सोचता हूं मुझे भी इनपे भरोसा तो नहीं तबस्सुम सोचती रहती है हमेशा वो रहे कहीं आपको भी ऐ… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: देख आऊं वो गिरा खून कहीं मेरा तो नहीं मेरी ही लाश सजी हो कहीं ऐसा तो नहीं टूट ही जाते हैं ख़्वाब, साँ … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: उसकी गली में देख तो मुझे आज मेरा पता मिला दैरोहरम भटका किया, दिलेबेख़बर में खुदा मिला जिस मोड़ से मै ब … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: पैमानेग़म बिखर गया तो मुश्किल होगी ये दिल से उतर गया तो मुश्किल होगी उसे देखा है आज मुद्दतों के बाद क … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: कैसा सजा है आज ये बाज़ार देख तो इन्सान ही इन्सां का खरीदार देख तो कैसा लगा है आज ये दरबार देख तो मुंस … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मै सजदे में उनके कुछ यूँ झुका था वो शरम कर के बोले सर को उठा लो हैं आँखों का काजल घटाओं सा फ़ैला कहीं … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: वो नहीं क़ातिल ये तो खंजर की ख़ता थी वो कहाँ बदले मेरी नज़र की ख़ता थी उस ही की दीवारें ज़रा मजबूत नहीं थ … more →