त्रिवेणी – अक्सर जाती हूँ मैं उस कुए के पास 1.अक्सर जाती हूँ मैं उस कुए के पास कंठ गीला करने जब लगती है प्यास | पर और बढ़ती जाए तुझसे मिलन की आस || 2.राह में मिल जाओ दौड़ती चली आउंगी तुम्हारे प्… more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: त्रिवेणी – अक्सर जाती हूँ मैं उस कुए के पास 1.अक्सर जाती हूँ मैं उस कुए के पास कंठ गीला करने ज … more →