कुछ तो था कुछ तो है तेरे-मेरे बीच सजनी वरना तुम यहाँ न आती वरना यादें तेरी न होती यूँ बरस गुज़रते हैं तेरे लिए तड़पते हैं तन्हा-तन्हा रात-दिन तेरे लिए तुम बिन कुछ तो था कुछ तो है तेरे-मेरे बीच सजनी… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 7 months ago: कुछ तो था कुछ तो है तेरे-मेरे बीच सजनी वरना तुम यहाँ न आती वरना यादें तेरी न होती यूँ बरस गुज़रते हैं … more →