विनय wrote 1 year ago: ख़िज़ाँ मुस्कुराने लगी सूखे पत्ते उड़ाने लगी दरख़्त की शाख़ों पर धूप की बूँदें नहीं सूरज का दरिया है … more →
विनय wrote 1 year ago: दरिया किनारे वह लड़की बाल सँवारे क़दमों के निशाँ पर बहते हैं पानी के धारे दिल की ज़ुबाँ तो दीवाना दिल … more →