वस्ल की रात तो राहत से बसर होने दो शाम से ही है ये धमकी के सहर होने दो जिसने ये दर्द दिया है वो दवा भी देगा लादवा है जो मेरा दर्द-ए-जिगर होने दो ज़िक्र रुख़सत का अभी से न करो बैठो भी जान-ए-मन रात गुज़रने… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: वस्ल की रात तो राहत से बसर होने दो शाम से ही है ये धमकी के सहर होने दो जिसने ये दर्द दिया है वो दवा … more →