Blogs about: दर्द बांटते चलो
उनका नाम ही दरियादिल हो जाता-कविता
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दीपक भारतदीप wrote 4 days ago: अपने दिल का बयां कभी कभी दूसरे के अल्फ … more »
गुरु-चेला और क्रिकेट
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दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: गुरु चेले जंगल से निकल कर शहर के मुख्य … more »
रामजी लगायेंगे बेडा पार-कविता
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दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: विश्वास धारण कर हृदय में रामजी करेंगे … more »
यकीन और हिम्मत से डटे रहो
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दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: समझौता ग़मों से कर लो दोस्ती नगमों से … more »
चुनते हैं भाषा से शब्दों को जो फूल की तरह
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: तुम्हारे मुख से निकले कुछ प्रशंसा के … more »
शब्द और बोतल का जिन्न
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: मस्तिष्क से विचारों और अंतर्द्वंद्व … more »
आदमी अपने सच से मूँह छिपाता है
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: उगते सूरज को करें सभी नमन डूबते से कभी … more »
वह औरत
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: दिन भर ईंट, पत्थर और सीमेंट का मसाला-त … more »
चकाचौंध में प्यार क्यों ढूंढते हो
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: हृदय में सूनापन लिए बाहर तुम चकाचौंध … more »
अपने साथ हमदमों को कर लो
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: समझौता ग़मों से कर लो दोस्ती नगमों से … more »
अपने साथ हमदमों को कर लो
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: समझौता ग़मों से कर लो दोस्ती नगमों से … more »
आगे भी ऐसे दृश्य आएंगे
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: शिष्य के हाथ से हुई पिटाई गुरुजी को मल … more »
मन के बहरों के आगे क्या बीन बजाना
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: अपनी-अपनी सब कहैं सुने न कोई किसी की बा … more »
ज्ञान के चिराग कुछ यूँ बेचे जा रहे हैं
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: बौद्धिक अँधेरे में ज्ञान के चिराग कुछ … more »
मय का मायाजाल
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: जब पीते थे तो कोई बुलाता नहीं था मांगत … more »
हर चमकने वाली चीज हीरा नहीं होती
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: क्रिकेट,फिल्म,राजनीति और और पत्रकारि … more »
अपने धर्म पर अटल रहना
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: दोस्त हम ऐसा चाहें जो वक्त पर काम आये प … more »
उन्हें सात पीढ़ियों की रोटी पकानी है
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: उनकी सोच है कि इधर लगाओ या उधर कहीं भी ब … more »
मैं क्यों लिखता हूँ-अपना विचार
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: मैं क्यों लिखता हूँ , मुझ … more »
