नै१ बुलबुले-चमन न गुले-नौदमीदा२ हूँ मैं मौसमे-बहार में शाख़े-बरीदा३ हूँ गिरियाँ न शक्ले-शीशा व ख़ंदा न तर्ज़े-जाम४ इस मैकदे के बीच अबस५ आफ़रीदा६ हूँ तू आपसे७ ज़बाँज़दे-आलम८ है वरना मैं इक हर्फ़े-आरज़ू… more →
तख़लीक़-ए-नज़रshreesh k. pathak wrote 2 weeks ago: “…..आज इक बार फिर तेरा ना होना नागवार गुजरा है. वीरानी शाम में आशिक हवाओं ने मुझे … more →
विनय wrote 3 months ago: नै१ बुलबुले-चमन न गुले-नौदमीदा२ हूँ मैं मौसमे-बहार में शाख़े-बरीदा३ हूँ गिरियाँ न शक्ले-शीशा व ख़ंदा … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: अपने पर ही यूं हंस लेता हूं। कोई मेरी इस हंसी से अपना दर्द मिटा ले कुछ लम्हें इसलिये उधार देता हूं। … more →
ktheleo wrote 4 months ago: मै अपने आप से कभी घबराता नहीं, पर खाम्खां सरे आईना यूंहीं जाता नहीं. चापलूसी,बेईमानी,और दगा, ऐसा कोई … more →
palakmathur wrote 5 months ago: दर्द कितना है दिल में न जान पाओगे, हम रोज़ अपने ग़म का इश्तेहार नहीं करते, जो आँख से टपकें लहू तो बत … more →
विनय wrote 7 months ago: आँखों की ख़ुशबू को छुआ नहीं महसूस किया जाता है दिल को बहलावा नहीं दर्द दिया जाता है दर्द जो है इश्क़ … more →
विनय wrote 8 months ago: सहर-ब-सहर1 मैं ढूँढ़ता रहा शुआएँ2 कहाँ छिप गयीं नूर-सी रोशन निगाहें न कोई घर रहा मेरा न कोई ठिकाना म … more →
kmuskan wrote 9 months ago: अपने जब दूर जाते है तो बहुत दर्द देते है पर अपने जब पास रह कर भी दूरिया बना लेते है तो दिल में एक कस … more →
jaybundelkhand wrote 10 months ago: महोबा। लोकसभा चु … more →
विनय wrote 10 months ago: जो मुझे होता है वह दर्द तुझ तक पहुँचे यूँ इस ख़ला की यह गर्द तुझ तक पहुँचे की है इस दिल ने सदा तुझसे … more →
jaybundelkhand wrote 11 months ago: सालन सें बुन्देलखण्ड में ढंग से न बरसो पानी , दूर दूर तक धूरा उड़ रई ,चौपट भई किसानी, कुआँ तला सब सूख … more →
jaybundelkhand wrote 11 months ago: सालन सें बुन्देलखण्ड में ढंग से न बरसो पानी , दूर दूर तक धूरा उड़ रई ,चौपट भई किसानी, कुआँ तला सब सूख … more →
विनय wrote 1 year ago: फिर वही दर्द, वही शाम है लबों पर फिर तेरा नाम है ज़िन्दा हूँ पर ज़िन्दगी नहीं सीने में साँसों का ताम-झ … more →
विनय wrote 1 year ago: उस्लूब*, उस्लूब, उस्लूब क्या पढ़ने वाले इनको समझते हैं वज़नी हो सीने पर गर ज़ख़्म उसे पढ़ने वाले दर्द … more →
विनय wrote 1 year ago: न वह कभी आँखों से उतारा ही गया और न कभी लबों से पिया ही गया वह इक दर्द का बवण्डर था शायद न जिसे कभी … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: जिंदगी दोस्तों के नाम कर दी, उनकी खातिर जान कुर्बान कर दी, मरने का हमे कोई गम नही, खुशी है दोस्तों क … more →
विनय wrote 1 year ago: मुझसे कोई प्यार कर ले दिल अपना देकर, दिल मेरा ले ले मुझसे कोई प्यार कर ले… तन्हाइयों का दर्द छ … more →
विनय wrote 1 year ago: वफ़ाइयाँ मेरी तुझसे ये वफ़ाइयाँ बेवफ़ाइयाँ मेरी ख़ुद से बेवफ़ाइयाँ अजब कशमकश है तेरे प्यार में जाने क्या … more →
विनय wrote 1 year ago: हम में जीतने का हौसला है ‘नज़र’ यह बाज़ी भी हम मारकर जायेंगे यह ज़ख़्म जाविदाँ नहीं रहने वा … more →