Blogs about: दर्शन

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महाभारत प्रकरण: यक्ष-युधिष्ठिर संवाद - महाजनो येन गतः सः पन्थाः1 comment

योगेन्द्र wrote 4 days ago: महाकाव्य महाभारत में ‘यक्ष-युधिष्ठिर संवाद’ नाम से एक पर्याप्त चर्चित प्रकरण है । संक्षेप में उसका व … more →

Tags: अध्यात्म, नीति, महाभारत, लोकव्यवहार, Mahabharata, Morals, Philosophy, काल, जीवधारी

भारतीय धर्म-दर्शन की परंपरा और भक्ति आंदोलन

kashyap omprakash wrote 5 days ago: भारतीय परंपरा में जीवन के चार पुरुषार्थ माने गए है. धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष. ये जीवन का मूल तत्व य … more →

Tags: भक्ति आंदोलन

लोभः पापस्य कारणम् (हितोपदेश) - लोभ से प्रेरित होती है ठगी

योगेन्द्र wrote 3 weeks ago: इधर कुछ दिनों से टीवी समाचार चैनलों पर ठगी के मामलों की चर्चा सुनने को मिल रही हैं । बताया जा रहा है … more →

Tags: नीति, संस्कृत-साहित्य, सूक्ति, हितोपदेश, Morals, ठगी, तृष्णा, महाभारत, लोभ

हाय, यह क्या किया - मेरा दिल ही टूट गया4 comments

उन्मुक्त wrote 3 weeks ago: किशोरावस्था में कदम रखते रखते मैंने, शायद हम सब ने,  आर्ची कॉमिक्स पढ़ना शुरु कर दिया। कॉमिक्स पढ़न … more →

Tags: विचार, सूचना, Archie, Archie Comics, Comic

संत कबीर वाणी-मूर्ख लोग सभी की पीड़ा एक समान नहीं मानते

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: पीर सबन की एकसी, मूरख जाने नांहि अपना गला कटाक्ष के , भिस्त बसै क्यौं नांहि संत शिरोमणि कबीरदास जी क … more →

Tags: alekh, आलेख, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम, मस्तराम, bharat, Deepak bharatdeep, dharm

विद्ययामृतमश्नुते, अर्थात् व्यक्ति विद्या से अमृतत्व प्राप्त करता है - ईशोपनिषद् मंत्र

योगेन्द्र wrote 1 month ago: ‘सत्यमेव जयते’ भारत सरकार द्वारा शासकीय प्रतीक-वाक्य के तौर पर अपनाया गया सूक्त है, जिससे बहुत से लो … more →

Tags: अध्यात्म, उपनिषद्, वेद, Philosophy, UPANISHADA, ved, ईशोपनिषद्, परमात्मा, मंत्र

चाणक्य नीति-दूसरों का आसरा लेने वाले जल्दी तबाह हो जाते हैं 4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: निर्धनं पुरुषं वेश्या प्रजा भग्नं नृपं त्यजेत्। खग चीतफल वृक्षं भुक्त्वा चाऽभ्यागता गृहम्।। हिंदी मे … more →

Tags: आलेख, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, Hindi Blogging, Hindi Darshan, hindi internet, hindi megzine

मनु स्मृति: अपने उपभोग से पहले दान करें

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: यानाश्य्यासनान्यस्य, कूपोद्यान ग्रह्यणि च। अदत्तान्युपयु´्जानः एनसः स्वात्तुरीभाक्।। हिंदी में भावार … more →

Tags: हिन्दी, adhyatm, अध्यात्म, धर्म, रहन सहन, हिंदी साहित्य, हिन्दू, dharm, hindi article

संत कबीरदास के दोहे-भगवान के साथ चतुराई मत करो

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सिहों के लेहैंड नहीं, हंसों की नहीं पांत लालों की नहीं बोरियां, साथ चलै न जमात संत शिरोमणि कबीर दास … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, इंटरनेट, दीपक भारतदीप, धर्म, मस्त राम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

माण्डूक्योपनिषद् वचन - परमात्मा एवं जीवात्मा के बीच आकाश-घटाकाश के सदृश संबंध

योगेन्द्र wrote 2 months ago: यह नितांत सत्य है कि सभी जीवधारियों का भौतिक अस्तित्व पदार्थमूलक है, अर्थात् उनके अस्तित्व की अनुभूत … more →

Tags: अध्यात्म, उपनिषद्, वेद, वैदिक भारत, जीवात्मा, पंचमहाभूत, परमात्मा, लिंग देह, सूक्ष्म शरीर

हमने जानी है रिश्तों में रमती खुशबू2 comments

उन्मुक्त wrote 2 months ago: यह चिट्ठी रिश्तों के बारे में है, उनसे निकलती खुशबू, जीवन के भावात्मक पहलू दर्द, प्रेम, मित्रता के … more →

Tags: Family, Inspiration, Life, relationship

इंटरनेट पर हिंदी का वैश्विक काल प्रारंभ हो चुका है-संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हिंदी में विभिन्न कालों की चर्चा बहुत रही है। सबसे महत्वपूर्ण स्वर्णकाल आया जिसमें हिंदी भाषा के लि … more →

Tags: आलेख, चिन्तन, दीपक भारतदीप, शब्द, साहित्य, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, Deepak bharatdeep, Global Dashboard

रहीम के दोहे:राम का नाम जपने वालों को विषय नहीं घेरते

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: रहिमन राम न उर धरै, रहत विषय लपटाय पसु खर खात सवाद सों, गुर बुलियाए खाय कविवर रहीम कहते है कि भगवान … more →

Tags: Hindi Education, Hindu darshan, Hindu culture, bharat, hindu dharm, web duniya, hindi media, hindi megzine, bhagvan shri ram

श्वेताश्वरोपनिषद् वचन: यथा तिल में तेल तथा देह में आत्मा

योगेन्द्र wrote 3 months ago: आत्मा-परमात्मा जैसी सत्ताएं होती हैं या नहीं इस बारे में मेरी कोई भी धारणा नहीं बन सकी है । कदाचित् … more →

Tags: अध्यात्म, उपनिषद्, वैदिक भारत, संस्कृत-साहित्य, Philosophy

काल की महिमा - महाकाव्य महाभारत के वचन1 comment

योगेन्द्र wrote 3 months ago: महाकाव्य महाभारत के परिचयात्मक प्रथम अध्याय में ‘काल’ यानी समय की महिमा का वर्णन किया गया है । इस अध … more →

Tags: अध्यात्म, प्राचीन-भारत, महाभारत, संस्कृत-साहित्य, सूक्ति, उग्रश्रवा, काल, जीव, नैमिषारण्य

दक्षिण एशिया के साहित्यकार आतंक पर सच लिख भी कहां पाये-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: अभी हाल ही में दक्षिण एशिया के देशों का एक साहित्यकार सम्मेलन संपन्न हुआ। इसमें भारत, पाकिस्तान,श्री … more →

Tags: आलेख, चिन्तन, vyangya, bharat, India, web dunia, web bhaskar, hindi sahitya, कथा साहित्य

षड्दर्शन

संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 4 months ago: षड्दर्शन उन भारतीय दार्शनिक एवं धार्मिक विचारों के मंथन का परिपक्व परिणाम है जो हजारों वर्षो के चिन … more →

Tags: भारतीय दर्शन, उत्तर मीमांसा, कपिल, गौतम, जैमिनी, न्याय, पतंजलि, पूर्व मीमांसा, बादरायण

मधुशाला पसंद है पर मद्यपान नहीं -व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: हिंदी भाषा के महान कवि हरिबंशराय बच्चन ने मधुशाला लिखी थी। अनेक लोगों ने उसे नहीं पढ़ा। कई लोग ऐसे ह … more →

Tags: आलेख, हिंदी, चिन्तन, व्यंग्य, web dunia, web bhaskar, web navabharat, कथा साहित्य, अभिव्यक्ति

अपनों की परवाह नहीं, परायों के लिए दीवानापन -व्यंग्य आलेख

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: मंदी से बाजार के ताकतवर सौदागर अधिक परेशान हो गये हैं। सभी जानते हैं कि प्रचार माध्यमों पर कही अप्र … more →

Tags: inglish, हास्य व्यंग्य, India, web dunia, web bhaskar, web navabharat, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, web naidunia


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