वक़्त का पहना उतार आये कुछ लम्हे मरके गुज़ार आये ख़ाबों में सही अपना तो माना दि… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 3 months ago: वक़्त का पहना उतार आये कुछ लम्हे मरके ग … more →
विनय wrote 7 months ago: एक मैं ही था शहंशाह सारे जहाँ का जब तलक … more →
विनय wrote 1 year ago: वो तस्कीं न मेरे दर पे माथा टेके न ही रौ … more →