विनय wrote 1 year ago: जिसे दवा जाना वह ज़हर निकला वह कि मेरा क़फ़न उड़ाकर निकला दो उंगलियों में मुझे यूँ मसला उसने मेरे दिल स … more →
विनय wrote 1 year ago: यह कैसा लम्हा है यह कैसा एहसास है तू पलकों में क़ैद है दिल के पास है क्या देखूँ तेरे सिवा क्या चाहूँ … more →
विनय wrote 1 year ago: तेरा चेहरा मेरे प्यार की तस्वीर है तू मोहब्बत है मेरी या फिर साँसों की ज़ंजीर है जब तुझे देखा सनम मुझ … more →
विनय wrote 1 year ago: मक़सद है मेरे पास क्या जीने को कहाँ से लाऊँ तुम-सा बहाना जीने को साँस चलती है ज़ख़्म करते हुए कौन कब त … more →