जिसे दवा जाना वह ज़हर निकला वह कि मेरा क़फ़न उड़ाकर निकला दो उंगलियों में मुझे यूँ मसला उसने मेरे दिल से फ़िराक़ का डर निकला जिस दिल को मैंने समन्दर जाना वह तो एक टूटी हुई लहर निकला तुम्हारे प्यार में जो म… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: जिसे दवा जाना वह ज़हर निकला वह कि मेरा क़फ़न उड़ाकर निकला दो उंगलियों में मुझे यूँ मसला उसने मेरे दिल स … more →
विनय wrote 1 year ago: यह कैसा लम्हा है यह कैसा एहसास है तू पलकों में क़ैद है दिल के पास है क्या देखूँ तेरे सिवा क्या चाहूँ … more →
विनय wrote 1 year ago: तेरा चेहरा मेरे प्यार की तस्वीर है तू मोहब्बत है मेरी या फिर साँसों की ज़ंजीर है जब तुझे देखा सनम मुझ … more →
विनय wrote 1 year ago: मक़सद है मेरे पास क्या जीने को कहाँ से लाऊँ तुम-सा बहाना जीने को साँस चलती है ज़ख़्म करते हुए कौन कब त … more →