और दाँव अपनी जाँ का किसने लगाया होगा फिर इश्क़ ने फ़रहाद कोई बुलाया होगा यूँ ही नहीं बिगड़ता है कोई किसी बात पे तुमने ज़रूर नमक में छालों को गलाया होगा इक मेरे’ कौन दूसरा दुनिया में तन्हा है तुमसे … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: और दाँव अपनी जाँ का किसने लगाया होगा फिर इश्क़ ने फ़रहाद कोई बुलाया होगा यूँ ही नहीं बिगड़ता है कोई कि … more →