कापर ढोटा नयन नचावत कोहे तिहारे बाबा की चेरी। गोरस बेचन जात मधुपुरी आये अचानक वनमें घेरी॥१॥ सेननदे सब सखा बुलाये बात ही बात समस्या फेरी। जाय पुकारों नंदजुके आगे जिन कोउ छुवो मटुकिया मेरी ॥२॥ गोकुल वसि… more →
पुष्टिमार्गpushtimarg wrote 2 years ago: कापर ढोटा नयन नचावत कोहे तिहारे बाबा की चेरी। गोरस बेचन जात मधुपुरी आये अचानक वनमें घेरी॥१॥ सेननदे स … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: दान मांगत ही में आनि कछु कीयो। धाय लई मटुकिया आय कर सीसतें रसिकवर नंदसुत रंच दधि पीयो॥१॥ छूटि गयो झ … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: आज दधि कंचन मोल भई। जा दधि को ब्रह्मादिक इच्छत सो गोपन बांटि दई॥१॥ दधि के पलटे दुलरी दीनी जसुमति खबर … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: रंचक चाखन देरी दह्यो। अद्भुत स्वाद श्रवन सुनि मोपे नाहित परत रह्यो॥१॥ ज्यों ज्यों कर अंबुज उर ढांकत … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: मोहन केसे हो तुम दानी। सूधे रहो गहो अपनी पति तुमारे जिय की जानी॥१॥ हम गूजरि गमारि नारि हे तुम हो सार … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: मोहन मांगत गोरस दान। कनक लकुट कर लसत सुभग अति कही न जात यह बान॥२॥ अति कमनीय कनक तन सुंदरी हसि परसत प … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: हमारो दान देहो गुजरेटी। बहुत दिनन चोरी दधि बेच्यो आज अचानक भेटी॥१॥ अति सतरात कहा धों करेगी बडे गोप क … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: तुम नंदमहर के लाल मोहन जाने दे। रानी जसुमति प्रान आधार मोहन जाने दे॥ ध्रु.॥ श्री गोवर्धन के शिखर तें … more →