ख़ुदाया कभी करम मुझ पर भी सुम्बुल की थोड़ी मेहर इधर भी प्यार क्या है नहीं जान… more →
विनय wrote 10 months ago: ख़ुदाया कभी करम मुझ पर भी सुम्बुल की थ … more →
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