दिनेश कुशवाह की एक कविता पूछती है मेरी बेटी जनक बहुत कुछ जानते थे सीते ! जैसे कि हल की मुठिया थामे बिना राजा नहीं समझ सकता दुख प्रजा का कि क्या होती है पोषिता कन्या पोषिता कुमारी ? कितना कठिन है… more →
अनहद नादPRIYANKAR wrote 2 years ago: दिनेश कुशवाह की एक कविता पूछती है मेरी बेटी जनक बहुत कुछ जानते थे सीते ! जैसे कि हल की मुठिया था … more →