कभी कभी ये सोचती हूँ कि क्या आंतकवादी इंसान नही होते अगर होते है तो क्यों उनकी आत्मा उन्हें धिक्कारती नही है……….जब वो निर्दोषों का लहू बहाते है क्यों उनकी आत्मा उनसे ये नही पूछती कि… more →
कुछ िदल सेदीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक तलाश पूरी होते ही आदमी दूसरी में जुट जाता अंतहीन सिलसिला है अपने मकसद रोज नये बनाता पूरे होते ही … more →
kmuskan wrote 1 year ago: कभी कभी ये सोचती हूँ कि क्या आंतकवादी इंसान नही होते अगर होते है तो क्यों उनकी आत्मा उन्हें धिक्कारत … more →