यूँ इश्क़ का हमने दिया है इम्तिहां अक़्सर मुँह में ज़ुबां होते हुए थे बेज़ुबां अक़्सर इश्क़ की तासीर ये समझा नहीं कोई इश्क़ में मिट जाते हैं नाम-ओ-निशां अक़्सर अश्क़ बिखर जाते हैं बरसात का पानी बनकर ख… more →
इक शायर अंजाना सा...रवि कुमार, रावतभाटा wrote 1 month ago: दीपावली फिर टल गई (a poem by ravi kumar, rawatbhata) आफ़ताब का दम भरने वाले दिए की लौ से खौफ़ खा गए आ … more →
Rohit Jain wrote 4 months ago: यूँ इश्क़ का हमने दिया है इम्तिहां अक़्सर मुँह में ज़ुबां होते हुए थे बेज़ुबां अक़्सर इश्क़ की तासीर … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: आज भी थोड़ा सा पढ़ के छोड़ दिया है ज़िंदगी का एक और सफ़हा मोड़ दिया है आज फिर सोचा के चुन लूँ ख़ार कुछ नये … more →