मुझे कपड़े दिलाना ये खिलाना वो खिलाना , यहाँ घुमाना वहाँ ले जाना या नई कोई फ़िल्म दिखाना , नहीं मुझे ऐसे दिवाली नहीं मनाना | हॅसना गाना और थोड़े पैसे बचाना , उससे एक भुखे को खाना खिलाना , इस बार दिवाल… more →
लम्हें जिन्दगी केKrishna Kumar Mishra wrote 1 month ago: कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिये कहाँ चराग़ मयस्सर नहीं शहर के लियेक १७ तारीख यानी दीपावली भार … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: यह प्रकाश पर्व है और इसी दिन लक्ष्मी जी की आराधना खुलकर की जाती है। वैसे तो लक्ष्मी का हर कोई भक्त ह … more →
गिरिजेश राव wrote 1 month ago: . . . अम्माँ, आज जब तुम दिया जलाओगी तो मुझे पता है कि आंसुओं को रोके रखोगी। दो बेटे, बहुएँ, नतिनियाँ … more →