बड़ी उम्मीद से मैं चला था तआक़ुब-ए-इश्क़ पर और दीदार उसका मुझको ही घायल कर गया ह… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय प्रजापति wrote 1 month ago: बड़ी उम्मीद से मैं चला था तआक़ुब-ए-इश्क़ … more →
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: दरवाज़े पे चुप-चुप से वह बैठे हैं दबा के … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: वह बारिश की छीटें वह बारिश की बूँदें फ … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: जीज़स से पूछेंगे तुमको बनाया कैसे कम्प … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: कब कहाँ रुकें, कब तक चलें ठहर जायें जहा … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: वह कहाँ चले गये जो कल घर आये थे हमारे थो … more →