Blogs about: दीपकबापू

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बजट का कटु सत्य-हास्य व्यंग्य (hindi vyangya on budget)

दीपक भारतदीप wrote 1 day ago: उन्होंने जैसे ही दोपहर में बजट देखने के लिये टीवी खोला वैसे ही पत्नी बोली-‘सुनते हो जी! कल तुमने दो … more →

Tags: arebic, आलेख, चिन्तन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन, हास्य व्यंग्य, हिंदी साहित्य, हिन्दी

बाजार में सजा स्वयंवर-हास्य व्यंग्य (bazar men swyanbar-hindi hasya vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 1 day ago: वैसे तो भारतीय संस्कृति और संस्कारों में लोगों को ढेर सारे दोष दिखाई देते हैं पर फिर भी वह उसमें तमा … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, दीपक भारतदीप, लघुकथा, व्यंग्य, हिन्दी, bharat, Blogging, Bloging

नही भज सकते अब साली और भाभी-व्यंग्य कविता (hasya vyangya kavita on bhabhi and sali)

दीपक भारतदीप wrote 1 day ago: दनदनाता हुआ आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू, तुम्हारे हिट होने के मिली गयी चाभी तुम भी बना लो कोई व्य … more →

Tags: दीपक भारतदीप, भारत, मनोरंजन, मस्तराम, व्यंग्य, शब्द, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, bharat

जो सभी को पसंद हो वही कहो -हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: प्रवचन करते समय गुरुजी ने भक्तों को समझाया। ‘‘भ्रष्टाचार करना होता बहुत बड़ा शाप दहेज समाज के लिये ह … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, मस्तराम, लघुकथा, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

आपरेशन तो आसान है -हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: सरकारी अस्पताल में एक सफाई कर्मचारी ने एक तीन साल के बच्चे के गले का आपरेशन कर दिया। उस बच्चे के गले … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिन्तन, दीपक भारतदीप, मनोरंजन, मस्तराम, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य

छोटा आदमी, बड़ा आदमी-लघुकथा

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: वह शिक्षित बेरोजगार युवक संत के यहां प्रतिदिन जाता था। उसने देखा कि उनके आशीर्वाद से अनेक लोगों की … more →

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समाज और खानदान की छबि -दो व्यंग्य क्षणिकायें

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: जिन कहानियों में हर पल क्लेशी पात्र सजाये जाते उसी पर बने नाटक सामाजिक श्रेणी के कहलाते सच है समाज … more →

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टेलीफोन की हड़ताल का तिलिस्म-व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: देश की एक टेलीफोन कंपनी में कर्मचारियों की हड़ताल हो गयी तो उसके इंटरनेट प्रयोक्ताओं को भारी परेशानी … more →

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दोनों ब्लॉग ज़ब्त होना चिंता का विषय नहीं-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: दूसरे का मामला हो तो दिलचस्प हो जाता है पर जब स्वयं उससे जुड़े हों तो चिंताजनक लगता है। यही इस लेखक … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, संपादकीय, Blogging, Dashboard, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika, Hindi Blog

विदुर नीति-जैसे दिल में ख्याल होते हैं वैसे ही बनता है नज़रिया

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: द्वेषो न साधुर्भवति न मेधावी न पण्डित। प्रिये शुभानि कार्याणि द्वेष्ये पापानि चैव ह।। हिंदी में भावा … more →

Tags: आचरण, आध्यात्म, कला, दीपक भारतदीप, मस्तराम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Deepak bapu

भर्तृहरि शतक-बेइज्जती से भी भूख कहाँ मिटती है

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भ्रान्तं देशमनेकदुर्गविषमं प्राप्तं न किंचित्फलं त्यकत्वा जातिकुलाभिमानमुचितं सेवा कृता निष्फला। भुक … more →

Tags: आलेख, इंडिया, दीपक भारतदीप, मस्तराम, हिंदी साहित्य, हिन्दी, Blogger, Blogging, Deepak bapu

गूगल ने दो हिन्दी ब्लाग जब्त किये-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: गूगल ने इस लेखक के दो ब्लाग को बिना किसी पूर्व चेतावनी और सूचना के हटा दिया है। यह दो ब्लाग हैं सिंध … more →

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बिना मेकअप के अभिनय-हास्य व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: फिल्म का नाम था ‘नौकरानी ने बनी रानी’ जोरदार थी कहानी। निर्देशक ने अभिनेत्री से कहा ‘आधी फिल्म में म … more →

Tags: vews, inglish, कविता, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, क्षणिका, Blogging, Friends

कुछ सच कुछ झूठ-लघु कथा

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: शादी में वह बच्चा अपने मां बाप और दादा के साथ गया। शादी उच्च घराने की थी। वहां तमाम तरह का तामझाम थ … more →

Tags: चिन्तन, दीपक द्वारा, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन, सृजन, हंसना, हास्य व्यंग्य, हिन्दी

बीच बाज़ार में-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सूरत देखकर ही लोग सिर पर ताज पहनाते हैं किसकी सीरत कौन देखेगा अपने काम पर लोग खुद ही शर्माते हैं. कह … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, मस्तराम, मातृभाषा, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bharatdeep

इन्सान जमीन पर कटते रहे-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: लुटता रहा पूरा शहर मगर लोग देखते रहे। ‘खराब ज़माना आ गया है’ एक दूसरे से बस यही कहते रहे। ‘बचाने के ल … more →

Tags: कविता, दीपक भारतदीप, नज़रिया, भारत, मनुस्मृति, व्यंग्य, शब्द, शायरी, हिन्दी

मनुस्मृति-अपशब्द का उत्तर अपशब्द से न दें

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अध्यात्मरतिरासीनो निरपेक्षो निरामिषः आत्मनैव सहायेन सुखार्थी विचरेदिह हिंदी में भावार्थ-अध्यात्म वि … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आध्यात्म, दीपक भारतदीप, धर्म, मातृभाषा, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Culture, Dashboard

व्यक्ति में चेतना लाने से ही समाज जागृत होगा-चिंतन

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अक्सर यह सुनने को मिलता है कि ‘महाभारत घर में नहीं रखना चाहिए क्योंकि इससे क्लेश होता है’। हो सकता … more →

Tags: abhivyakti, Anubhuti, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, दीपक भारतदीप, मस्तराम, संपादकीय, संस्कार

कबीर दास के दोहे: अंधों के आगे रोना, अपनी आँखें बेकार में खोना

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: संत कबीरदास जी का कहना है ——————— गाहक मिलै तो कुछ कहूं, न … more →

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