दुनियां की तबाही देखने के लिये इंसान का दिल क्यों मचलता है हमारी आंखों के सामने ही सब खत्म हो जाये फिर कोई यहां जिंदा न रह पाये यही सोचकर उसका दिल बहलता है। हम न होंगे पर यह दुनियां रहेगी यही सोच उसका… more →
दीपक भारतदीप की शब्द- पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 3 days ago: दुनियां की तबाही देखने के लिये इंसान का दिल क्यों मचलता है हमारी आंखों के सामने ही सब खत्म हो जाये फ … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: हमदर्दी जताने की कला हमें कभी नहीं आई किसी का दर्द देखकर मन रोया मन भर आंसु पर आंखें दरिया न बन पाई। … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: भारत में इंटरनेट प्रयोक्ताओं की संख्या सात करोड़ से ऊपर है-इसका सही अनुमान कोई नहीं दे रहा। कई लोग इस … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: एक दोस्त ने फोन पर दूसरे दोस्त से ‘क्या स्कोर चल रहा है दूसरा बिना समझे तत्काल बोला ‘यार, ऐसा लगता ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: महात्मा गांधी के दर्शन की प्रासंगिकता आज भी है। इसमें संदेह नहीं है। अगर कहें आज अधिक है तो भी कोई ब … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: शादी में वह बच्चा अपने मां बाप और दादा के साथ गया। शादी उच्च घराने की थी। वहां तमाम तरह का तामझाम था … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: वह युवक गरीब था तब संत के पास जाता था। वह उनके यहां आश्रम की साफ सफाई करता और फिर अपने काम पर चला जा … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: ज्ञान किसी समाज की संपत्ति नहीं होता-आलेख इस बार गुडफ्राइडे के अवसर पर वैटिकन सिटी में आयोजित एक प्र … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: अंतर्जाल पर हिंदी में सक्रिय कई ऐसे ब्लाग लेखक हैं जिन्हें लिखते हुए छह साल हो गये हैं। उन लोगों की … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: उस दिन चिट्ठकार चर्चा का नियमित ईमेल पढ़ा-यह ईमेल इसके सदस्यों को नियमित भेजा जाता है-जिसमें तमिल बच … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: एक दिवसीय मैचों के श्रंखला में आस्ट्रेलिया ने भारत को अभी दो मैचों में हराकर यह सिद्ध कर दिया है कि … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: ऐक सामाजिक संगठन को योग्य दामाद प्रतियोगिता करने का शौक चर्राया समाज में लड़के अच्छे दामाद … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: (यह व्यंग्य कविता काल्पनिक हैं और किसी घटना या व्यक्ति से इसका कोई संबंध नहीं है) लड़ते रहो दोस्तो … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: नये लेखक जिन्होंने अभी हाल ही में इंटर नेट पर लिखना शुरू किया है और जो पहले से ही लिख रहे हैं और मेर … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: अक्सर लोग यह कहते हैं कि हमें धर्म की जरूरत क्यों है? हम अपना काम अच्छी … more →