मै दिल की दीवारों से निकल आया हूँ मै ग़म के नज़ारों से निकल आया हूँ मुजरिमों कि क़तारों से निकल आया हूँ मै ज़िंदगी के शरारों से निकल आया हूँ आजकल फ़िक़्र करता हूँ रोटियों की मै मै अब चाँद-तारों से निकल आया … more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: मै दिल की दीवारों से निकल आया हूँ मै ग़म के नज़ारों से निकल आया हूँ मुजरिमों कि क़तारों से निकल आया हूँ … more →