एक बार देखा था तुझे हाथों में चिराग़ लिए चौखट पर खड़ी थी चाँद की निगाहें तुझ पर टिकी थीं सारी ज़मीं नवेली दुल्हन की तरह सजी थी कानों में पटाखों का शोर और आँखों में मेहताब की रंगीन रोशनियाँ थीं कुछ शामीन… more →
तख़लीक़-ए-नज़रHarihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: खुशियों की बौछार खिलखिलाता मौसम आया उड़ता है मन मगन धरा पर गगन उतर आया देवालय पर पूर्ण चन्द्रमा अनहोन … more →
विनय wrote 1 year ago: एक बार देखा था तुझे हाथों में चिराग़ लिए चौखट पर खड़ी थी चाँद की निगाहें तुझ पर टिकी थीं सारी ज़मीं नव … more →