हम अपने आप से कुछ यूं बदला लेते हैं हमपे सितम करने वाले को भी दुआ देते हैं। यूं तो हमें हंसने का भी नहीं है इल्म उनसे भले गम भी मिले तो मुस्करा लेते हैं। चोरी छिपे करते है उनका दीदार औ जुस्तजू सामना ह… more →
आंसू ही है जो जीने की ललक देते हैंwrote 5 months ago: चाहे जले हमारा जहाँ, रौशन रहे उनका जहाँ, जहाँ रहे चाहत हमारी… न आए उन पर, कोई भी आँच, जहां की … more →
wrote 6 months ago: तेरी ज़िंदगीं में कभी, धूप की तपन न हो, हो ज़रा भी आशंका, मेरा आंचल, तेरे सर पर हो, तेरी राहों मे क … more →
wrote 9 months ago: सहर-ब-सहर1 मैं ढूँढ़ता रहा शुआएँ2 कहाँ छिप गयीं नूर-सी रोशन निगाहें न कोई घर रहा मेरा न कोई ठिकाना म … more →
wrote 1 year ago: तुम दुआ करो अपने प्यार के लिए मैं दुआ करूँ अपने प्यार के लिए, फिर देखें दुआ किसकी क़बूल होती है! शायि … more →
wrote 1 year ago: हम अपने आप से कुछ यूं बदला लेते हैं हमपे सितम करने वाले को भी दुआ देते हैं। यूं तो हमें हंसने का भी … more →
wrote 1 year ago: तुम जो देखते हो मैं भी जानता हूँ यह सब हुनर मैं भी जानता हूँ यह ख़ाब कच्चे तागे-सा है मगर सुबह टूट ज … more →
wrote 1 year ago: मैं जब दुआ करूँ तुम आमीन कहो और दुआ क़ुबूल हो जाये शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’ लेखन वर्ष: २००३ … more →
wrote 1 year ago: कितने दिन हुए कोई टूटता सितारा नहीं देखा मेरे हश्र को एक यह बुनियाद और सही… क्या तू अब भी मुझे … more →
wrote 1 year ago: आती-जाती रहती हैं यह सदियाँ रास्ते पर रहती हैं मेरी दो अँखियाँ तेरे इंतज़ार में तुझे देखने के लिए जान … more →
wrote 1 year ago: कुछ-कुछ होता है सनम जब-जब तुमसे मिलते हैं कैसे कहें हम सनम तुमसे मोहब्बत करते हैं… दिल डरता है … more →
wrote 1 year ago: दूदे-तन्हाई के उस पार क्या है वह ख़ुद है या उसके हुस्न की ज़या है बेवजह किसी की याद यूँ सताती नहीं मे … more →
wrote 2 years ago: मेरा दर्द मेरा दु:ख मेरा अपना है बाक़ी सब झूठ है यह सच्चा सपना है कल तक लबों पर उसके लिए दुआ थी आज दु … more →
wrote 2 years ago: तू कर यह वादा भी मेरे अल्लाह तू संग न होगा तू है भी अगर किसी बुते-संग में तू संग न होगा तेरी मर्ज़ी स … more →
wrote 2 years ago: गिर जायेगा इस बरसात में घर तुम हो उधर हम हैं इधर जंगल ही जंगल है सब वीराना-सा जिस सिम्त दौड़ती है नज़ … more →
wrote 2 years ago: हर गली हर कूचा दर-ब-दर ढूँढ़ते हैं हम अपनी दुआ में असर ढूँढ़ते हैं तुम देखकर हँसते हो मुझे और हम तेर … more →
wrote 2 years ago: एक मुलाक़ात की इल्तजा है उससे दुआ है वह क्यों नहीं मिलता मुझसे उसे क्या शुबा है मुझ मुरीद को न क़रार ह … more →
wrote 2 years ago: इक मौक़ा दो तुम मुझे कि बता सकूँ कितना टूटकर प्यार करता हूँ तुमसे तुम्हें जो चाहिए सब दूँगा मैं प्यार … more →