(1) , (2) भूमिका (3) लंठ महाचर्चा: ‘बाउ’ हुए मशहूर, काहे? (4) समय: ब्रिटिश काल, परम्परा: श्रौत (अ) ‘परबतिया के माई‘ एक गौरवर्णा थुलथुल महिला थी जिसकी ऊँचाई तीन हाथ सेकुछ अधि… more →
एक आलसी का चिठ्ठाGirijesh Rao wrote 1 week ago: (1) , (2) भूमिका (3) लंठ महाचर्चा: ‘बाउ’ हुए मशहूर, काहे? (4) समय: ब्रिटिश काल, परम्परा … more →
Girijesh Rao wrote 1 month ago: नज्म बहुत सरल सी दिखती है, प्रेमी प्रेमिका से कह रहा है कि तुम अभी भी सुन्दर हो लेकिन जमाने में इतने … more →
विनय wrote 1 year ago: मुझसे कोई प्यार कर ले दिल अपना देकर, दिल मेरा ले ले मुझसे कोई प्यार कर ले… तन्हाइयों का दर्द छ … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: दुख के चेहरे पर लकीरें याद की सुन रहा हूं सदा दिलेबरबाद की तेरी महफ़िल तेरा परचम ओ’ हुजूम अब कि … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरा दर्द मेरा दु:ख मेरा अपना है बाक़ी सब झूठ है यह सच्चा सपना है कल तक लबों पर उसके लिए दुआ थी आज दु … more →