और कैसे रक़ीब के यार हमसे पेश आते वह हमसे अय्यारी नहीं तो और क्या फ़रमाते हमारी क़िस्मत में जीते-जी फ़ना होना लिखा था क्योंकर न हम अपने रक़ीबों से मात खाते मैं ही मिला अपने ख़ुदा को इस सबके लिए हरीफ़ाना क्य… more →
तख़लीक़-ए-नज़रडा. अमर कुमार wrote 10 months ago: एक मेडिकल बोर्ड बनाया गया, जिसमें तीन डाक्टर थे । उन बुद्धू की जब कुछ समझ में न आया, तो यह कह दिया … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: वस्ल की रात तो राहत से बसर होने दो शाम से ही है ये धमकी के सहर होने दो जिसने ये दर्द दिया है वो दवा … more →
विनय wrote 1 year ago: और कैसे रक़ीब के यार हमसे पेश आते वह हमसे अय्यारी नहीं तो और क्या फ़रमाते हमारी क़िस्मत में जीते-जी फ़ना … more →